वानर राज की सीढ़ियों का रहस्य

प्राचीन पत्थर की अनंत सीढ़ियां जो स्वर्णिम धुंध में विलीन हो रही हैं, एक विशाल यात्रा का प्रतीक
धुंध में खो जाती सीढ़ी — पूरी चढ़ाई अदृश्य है, पर अगले दो कदम हमेशा स्पष्ट हैं।
वानर राजा की सीढ़ियों की पहेली
गुरुकुल कथा I

🪷 वानर राजा की सीढ़ियों की पहेली

कदमों, स्मृति और स्पष्टता की कथा — जहाँ एक साधारण सीढ़ी Dynamic Programming का पहला पाठ बन जाती है।

पात्र: वानर राज, अर्जुन, गुरु बोधि · स्तर: शुरुआती · पैटर्न: Dynamic Programming (1D)

प्राचीन भारतीय गुरुकुल
गुरुकुल की पहाड़ी पर भोर — जहाँ हर सीढ़ी एक पाठ छुपाए बैठी है।

🎭 हमारे पात्र

🐵 वानर राज (Monkey King) — गुरुकुल के परीक्षक और चुनौती देने वाले। वे विद्यार्थियों को कठिन प्रश्नों से जांचते हैं, ताकि उनका सच्चा ज्ञान सामने आए। वे स्वयं पढ़ाते नहीं, बल्कि समस्या को प्रकट करते हैं।
🧘 गुरु बोधि (Guru Bodhi) — गुरुकुल के मुख्य शिक्षक और ज्ञान के मार्गदर्शक। जब विद्यार्थी व्याकुल हो जाते हैं, तब वे आते हैं और धैर्य से समाधान सिखाते हैं। वे समस्या का उत्तर नहीं देते, बल्कि सोचने का तरीका सिखाते हैं।
👨‍🎓 अर्जुन — एक युवा विद्यार्थी जो coding सीख रहा है। उसमें उत्साह है, पर जटिल समस्याओं से घबरा जाता है। यह उसकी यात्रा है—घबराहट से स्पष्टता की ओर।

इस कथा में, वानर राज समस्या खड़ी करते हैं, और गुरु बोधि समाधान सिखाते हैं। दोनों अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं—एक परीक्षा लेता है, दूसरा ज्ञान देता है।

📜 प्रभात सूत्र — परीक्षा का दिन

गुरुकुल में सूर्योदय। सुनहरी रोशनी पत्थर की सीढ़ियों पर फैल गई। सुबह की धुंध धीरे-धीरे उठ रही थी।

आज विशेष दिन था। वानर राज आए थे—वे जो विद्यार्थियों को कठिन पहेलियों से परखते हैं। रटने वाले और सोचने वाले में फर्क करते हैं।

सीढ़ियों के नीचे खड़ा था अर्जुन। युवा, उत्सुक, और पहले से हार चुका।

छाती में जकड़न थी। वही feeling जो हर exam से पहले आती है। कितनी सीढ़ियाँ होंगी? पचास? सौ? पूरी रात वो गिनता रहा—छत को घूरता रहा—और संख्याएं बस... बढ़ती गईं। गुणा होती गईं। कितने तरीकों से असफल हो सकता हूं? उसका दिमाग फुसफुसाया। सभी तरीकों से।

बहुत ऊपर बैठे थे वानर राज। स्थिर। लाठी गोद में। पूंछ आकाश की ओर मुड़ी—एक प्रश्नचिह्न की तरह।

टोक।
लाठी से एक थपकी। पत्थर ने गूंज दी।
चुनौती शुरू हो चुकी थी।

📜 प्रश्न सूत्र — वानर राज की चुनौती

वानर राज ऊपर से देख रहे थे। उन्होंने हज़ारों विद्यार्थियों को ठीक वहीं खड़े देखा था—कंधे झुके, असफलता पहले से गिन रहे।

वानर राज: "अर्जुन! सुनो।" उन्होंने लाठी से पत्थर पर खोदा—5। "यहां से मेरे पास तक पांच सीढ़ियां हैं। तुम एक-एक सीढ़ी चढ़ सकते हो, या दो सीढ़ियां एक साथ। अब बताओ—ऊपर पहुंचने के कितने अलग-अलग तरीके हैं? सभी गिनो। एक भी मत छोड़ो।"

अर्जुन का पेट ऐसे सिमटा मानो धरती खिसक गई हो। अलग-अलग तरीके? उसका दिमाग घूम गया। "मतलब… 1-1-1-1-1 एक तरीका है, और 2-1-1-1 दूसरा, और 1-2-1-1 तीसरा…" उसे तो ऊपर का छोर भी दिखाई नहीं दे रहा।

अर्जुन: "महाराज, मैं… यह कोई छल होगा। तीन सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते ही मेरी सांस—" उसकी आवाज़ टूट गई। "मैं उन राहों को कैसे गिनूं जो दिखतीं ही नहीं? बहुत हैं। बहुत सारी शाखाएं, बहुत—"

शब्द गले में अटक गए। उसने माथे पर हथेली रख दी। एक-एक-एक। एक-दो। दो-एक। एक-एक-दो… संयोजन उसके दिमाग में पटाखों की तरह फूट रहे थे, हर एक और अधिक संभावनाओं में टूट रहा था, और अधिक, और अधिक

वानर राज की मुस्कान चौड़ी हुई—उपहास नहीं, जानने वाली। किसी ऐसे की मुस्कान जिसने घबराहट का यह पल हज़ार बार पहले देखा हो।

वानर राज: "आह। वही भाव। वही दृष्टि।" वे लाठी पर झुके। "अधिकतर लोग सीढ़ियां देखकर सिर्फ फेफड़ों और मांसपेशियों के बारे में सोचते हैं। तुम मार्ग देख रहे हो—अनंत, शाखित, भयावह। अच्छा है। यही पहला कदम है। यह घबराहट का मतलब है—तुम सोच रहे हो।"

📜 व्याकुलता सूत्र — गुरु बोधि का आगमन

कदमों की आहट। वस्त्रों के पत्थर पर रगड़ने की आवाज़।

गुरु बोधि प्रकट हुए। शांत। वह शांति जो हज़ारों विद्यार्थियों को एक ही समस्या पर घबराते देखने से आती है।

वानर राज समस्या देते हैं, गुरु बोधि समाधान सिखाते हैं—यही परंपरा है। जब विद्यार्थी घबराते हैं, तब गुरु आते हैं।

गुरु: "यह प्रश्न तुम्हें क्यों व्याकुल कर रहा है, अर्जुन? अपना भय स्पष्ट रूप से कहो।"
अर्जुन: "गुरुजी, मैं... नहीं कर पा रहा। हर बार गिनने की कोशिश करता हूं तो दिमाग—" उसने बेबसी से इशारा किया। "सीढ़ी 1, ठीक है। सीढ़ी 2, हाँ, दो तरीके। पर सीढ़ी 3? अब मुझे दोनों याद रखनी हैं। सीढ़ी 4? अब तीन चीज़ें। सीढ़ी 10 तक पहुंचते-पहुंचते तो मैं पूरी तरह खो जाता हूं।"

उसने कनपटी पर हथेलियां रख दीं। "यह ऐसा है मानो—हर सीढ़ी और branches में बंट जाती है। एक-एक-एक-दो-एक, दो-एक-एक, एक-दो-एक-एक—मैं ट्रैक खो देता हूं। भूल जाता हूं कि क्या गिना। फिर से शुरू करता हूं। जैसे एक recursive function को debug कर रहा हूं जिसका base case ही नहीं मिल रहा।"

उसके हाथ कांप रहे थे।

गुरु बोधि फौरन नहीं बोले। खड़े रहे। अर्जुन की घबराहट को शांत होने दिया। फिर धीरे से लाठी पहली सीढ़ी पर रखी।

गुरु: "तो चलो ऊपर से नीचे गिनने की बजाय, नीचे से ऊपर बनाएं। जो सीखें उसे याद रखें, भूलें नहीं।"

📜 विवेक सूत्र — DP Pattern की खोज

गुरु बोधि ने अर्जुन के कंधे पर हाथ रखा। "अब मैं तुम्हें सोचने का तरीका सिखाऊंगा, वत्स।"

गुरु: "पूरे पर्वत को देखना बंद करो, अर्जुन। एक सीढ़ी देखो। हर स्तर i तक का मार्ग—चाहे कितना भी असंभव ऊंचा क्यों न हो—बस दो जगहों से आता है और केवल दो से: स्तर i−1 से एक छोटा कदम, या स्तर i−2 से एक छलांग।"

उन्होंने लाठी से पहली सीढ़ी पर दो निशान खोदे। एक, फिर दूसरा। सरल। साफ़।

ways(i) = ways(i − 1) + ways(i − 2)

Base truths:
dp(0) = 1   # स्थिर खड़े रहना, प्रारंभ
dp(1) = 1   # पहला कदम उठाने का एक तरीका

अर्जुन ने उन निशानों को देखा। फिर ऊपर की सीढ़ियों को।

कुछ click हुआ।

सीढ़ियां नहीं बदलीं। अभी भी उतनी ही ऊंची थीं। पर छाती की जकड़न... ढीली हो गई। वो फिर से सांस ले सकता था।

दिमाग में जो अराजकता थी... रुक गई। स्थिर हो गई।

हर सीढ़ी कोई रहस्य नहीं थी। बस पिछली दो का योग थी। उतना सरल। Dominos की तरह—हर एक को बस पहले वाले की ज़रूरत थी।

अर्जुन: "मुझे… मुझे पूरा पर्वत देखने की ज़रूरत नहीं है।" उसकी आवाज़ धीमी, स्थिर निकली। "मुझे बस दो सीढ़ियां देखनी हैं। मेरे पीछे वाली। दो कदम पीछे वाली। और फिर… मैं इस वाली को जान सकता हूं।" उसने अपने पैरों के नीचे पत्थर छुआ, ठोस और सच्चा। "हर लंबी यात्रा बस… छोटी यात्राएं हैं। याद की गईं। जोड़ दी गईं।"

उसकी आंखें फैल गईं। "यह brute force नहीं है। यह स्मृति शक्ति के रूप में है। यह—"

गुरु: "Dynamic Programming।" शब्द कोमल पर निश्चित उतरे। "तुमने इसे अभी खोज लिया, वत्स। वह कला जो याद रखती है कि तुमने क्या हल किया ताकि तुम उसे दोबारा हल करने में समय बर्बाद न करो। स्मृति प्रगति को आकार देती है। पैटर्न वह प्रकट करता है जो अराजकता जैसा दिखता था।"
वानर राज: "अब तुम देख रहे हो। हांफती फेफड़ों और कांपती टांगों से मत चढ़ो। समझ से चढ़ो।" उन्होंने लाठी एक बार थपकी दी—टोक। "घबराहट से मत लड़ो। पैटर्न से लड़ो।"

💻 समाधान सूत्र — Python में DP Algorithm

अर्जुन ने धूल में एक छड़ी उठाई और सीढ़ी के बगल वाली चट्टान पर लिखना शुरू किया। उसकी आंखों में अब स्पष्टता थी।

अर्जुन: "गुरुजी, मैं समझ गया। यदि मुझे n सीढ़ियां चढ़नी हैं, तो मैं बस इतना करूंगा:"

📝 Step-by-Step विचार प्रक्रिया:

🎯 हमें क्या निकालना है?
5 सीढ़ियां चढ़ने के कुल कितने UNIQUE WAYS हैं? (हर बार 1 या 2 सीढ़ी चढ़ सकते हैं)
  1. समस्या को समझो: हर कदम पर, मैं या तो 1 सीढ़ी चढ़ सकता हूं या 2 सीढ़ियां। मुझे कुल कितने अलग-अलग combinations हैं? (न कि कितनी जल्दी पहुंचूंगा)
  2. Base cases खोजो:
    • अगर 0 सीढ़ियां हैं? → 1 तरीका (खड़े रहो)
    • अगर 1 सीढ़ी है? → 1 तरीका (सिर्फ "1")
    • अगर 2 सीढ़ियां हैं? → 2 तरीके ("1+1" या "2")
  3. Pattern देखो: सीढ़ी i तक पहुंचने के लिए, मैं या तो i-1 से आया (1 कदम लिया) या i-2 से आया (2 कदम की छलांग ली)
  4. Formula बनाओ: ways(i) = ways(i-1) + ways(i-2)
    (क्योंकि i-1 के सभी ways में "+1" जोड़ो, और i-2 के सभी ways में "+2" जोड़ो)
  5. याद रखो (Memoize): हर उत्तर को एक array में स्टोर करो ताकि दोबारा गिनना न पड़े

🐍 Python Code — Dynamic Programming Solution

Python — Climbing Stairs (DP Approach)
def climbing_stairs(n):
    # Step 1: अगर सीढ़ियां 0 या 1 हैं, तो सीधा जवाब दे दो
    if n == 0:
        return 1  # खड़े रहने का 1 तरीका
    if n == 1:
        return 1  # एक कदम का 1 तरीका
    
    # Step 2: एक array बनाओ जहां हर index का उत्तर स्टोर होगा
    dp = [0] * (n + 1)
    
    # Step 3: Base cases को भरो
    dp[0] = 1  # 0 सीढ़ियां = 1 तरीका
    dp[1] = 1  # 1 सीढ़ी = 1 तरीका
    
    # Step 4: सीढ़ी 2 से लेकर n तक, हर एक का उत्तर निकालो
    for i in range(2, n + 1):
        # Pattern: i तक पहुंचने के तरीके = (i-1 के तरीके) + (i-2 के तरीके)
        dp[i] = dp[i - 1] + dp[i - 2]
    
    # Step 5: आखिरी सीढ़ी तक पहुंचने के कुल तरीके return करो
    return dp[n]


# उदाहरण: 5 सीढ़ियां चढ़ने के कितने तरीके?
n = 5
result = climbing_stairs(n)
print(f"{n} सीढ़ियां चढ़ने के तरीके: {result}")

# Output: 5 सीढ़ियां चढ़ने के तरीके: 8

🔍 कैसे काम करता है? (Step-by-Step Example)

Problem: 5 सीढ़ियां चढ़ने के कितने अलग-अलग तरीके हैं? (हर बार 1 या 2 सीढ़ी)

DP Array का निर्माण:

dp[0] = 1  → 0 सीढ़ी (खड़े रहना): 1 तरीका
dp[1] = 1  → 1 सीढ़ी: 1 तरीका → [1]
dp[2] = dp[1] + dp[0] = 1 + 1 = 2  → 2 सीढ़ियां: 2 तरीके → [1,1] या [2]
dp[3] = dp[2] + dp[1] = 2 + 1 = 3  → 3 सीढ़ियां: 3 तरीके → [1,1,1] या [1,2] या [2,1]
dp[4] = dp[3] + dp[2] = 3 + 2 = 5  → 4 सीढ़ियां: 5 तरीके
dp[5] = dp[4] + dp[3] = 5 + 3 = 8  5 सीढ़ियां चढ़ने के 8 अलग तरीके!
🎯 Answer 8 का मतलब: 5 सीढ़ियां चढ़ने के 8 unique combinations हैं:

1️⃣ 1+1+1+1+1 (5 बार एक-एक सीढ़ी)
2️⃣ 2+1+1+1 (पहले 2, फिर तीन बार 1)
3️⃣ 1+2+1+1
4️⃣ 1+1+2+1
5️⃣ 1+1+1+2
6️⃣ 2+2+1 (दो बार 2, फिर 1)
7️⃣ 2+1+2
8️⃣ 1+2+2

हम यह नहीं पूछ रहे कि "कितनी जल्दी पहुंचें" — हम पूछ रहे हैं "कितने DIFFERENT WAYS से पहुंच सकते हैं"
गुरु: "देखो अर्जुन, सीढ़ी 5 तक पहुंचने के तरीके = (सीढ़ी 4 के तरीके) + (सीढ़ी 3 के तरीके)। क्योंकि सीढ़ी 4 से तुम 1 कदम लेकर 5 पर आ सकते हो, और सीढ़ी 3 से तुम 2 कदम की छलांग लेकर 5 पर आ सकते हो। हर नई सीढ़ी के लिए तुमने पिछली दो सीढ़ियों के उत्तर याद रखे और उन्हें जोड़ दिया। यही है Dynamic Programming—भूतकाल को याद रखना ताकि भविष्य आसान बन जाए।"

⚡ Time और Space Complexity

  • Time Complexity: O(n) — हम सिर्फ एक बार loop चलाते हैं, 2 से n तक
  • Space Complexity: O(n) — हम एक dp array रखते हैं size n+1 का

💡 Pro Tip: Space को और optimize कर सकते हो! हमें पूरा array नहीं चाहिए—बस पिछली दो values चाहिए। इससे Space Complexity O(1) हो जाएगी।

अर्जुन: "अब मैं देख सकता हूं। हर कदम पर, मुझे बस दो चीजें याद रखनी हैं—पिछला और उससे पहले का। बाकी सब… बाकी सब तो बस इन दोनों का योग है।" उसकी आवाज़ में आश्चर्य था। "यह इतना सरल है। फिर भी इतना शक्तिशाली।"

🔢 बोनस उदाहरण — Fibonacci Sequence (फिबोनाची श्रृंखला)

वानर राज: "अर्जुन, अब तुम pattern समझ गए हो। तो बताओ—क्या तुम इसी pattern को कहीं और भी देख सकते हो?"

अर्जुन ने सोचा। फिर उसकी आंखें चमकीं। "महाराज… वह पुरानी पहेली! Fibonacci numbers! 0, 1, 1, 2, 3, 5, 8, 13… हर संख्या पिछली दो का योग होती है!"

🎯 Fibonacci Problem: nवीं Fibonacci number निकालो

Series: 0, 1, 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, 89...

Pattern:
• F(0) = 0
• F(1) = 1
• F(n) = F(n-1) + F(n-2)

यह बिल्कुल सीढ़ियों जैसा ही है! Same DP pattern!

🐍 Fibonacci — Python DP Code

Python — Fibonacci with DP
def fibonacci(n):
    # Base cases
    if n == 0:
        return 0
    if n == 1:
        return 1
    
    # DP array बनाओ
    dp = [0] * (n + 1)
    
    # Base values
    dp[0] = 0
    dp[1] = 1
    
    # हर position के लिए पिछली दो values का sum
    for i in range(2, n + 1):
        dp[i] = dp[i - 1] + dp[i - 2]
    
    return dp[n]


# Example: 10वीं Fibonacci number?
n = 10
result = fibonacci(n)
print(f"{n}वीं Fibonacci number: {result}")

# Output: 10वीं Fibonacci number: 55

📊 Step-by-Step Example (n=7)

F(0) = 0
F(1) = 1
F(2) = F(1) + F(0) = 1 + 0 = 1
F(3) = F(2) + F(1) = 1 + 1 = 2
F(4) = F(3) + F(2) = 2 + 1 = 3
F(5) = F(4) + F(3) = 3 + 2 = 5
F(6) = F(5) + F(4) = 5 + 3 = 8
F(7) = F(6) + F(5) = 8 + 5 = 13
🎓 दोनों Problems में Common Pattern:

Climbing Stairs: ways(i) = ways(i-1) + ways(i-2)
Fibonacci: F(n) = F(n-1) + F(n-2)

दोनों में same DP formula! बस base cases अलग हैं।
• Stairs: dp[0]=1, dp[1]=1
• Fibonacci: F(0)=0, F(1)=1
📖 Fibonacci की असली कहानी — खरगोशों की समस्या

सन् 1202 में, इटली के गणितज्ञ Leonardo Fibonacci ने एक पहेली पूछी:

"मान लो एक जोड़ी नवजात खरगोश (नर और मादा) एक बंद मैदान में रखे गए हैं। खरगोश 1 महीने में mature होते हैं और दूसरे महीने से हर महीने एक नई जोड़ी पैदा करते हैं। खरगोश कभी मरते नहीं। 1 साल बाद कितनी जोड़ियां होंगी?"

महीना-दर-महीना:
महीना 0: 1 जोड़ी (नवजात) → F(0) = 1
महीना 1: 1 जोड़ी (अभी mature नहीं) → F(1) = 1
महीना 2: 2 जोड़ी (पहली + 1 नई) → F(2) = 2
महीना 3: 3 जोड़ी (2 पुरानी + 1 नई) → F(3) = 3
महीना 4: 5 जोड़ी → F(4) = 5
महीना 5: 8 जोड़ी → F(5) = 8

Pattern: हर महीने की जोड़ियां = पिछले महीने की + दो महीने पहले की (क्योंकि 2 महीने पुरानी जोड़ियां ही reproduce करती हैं)

यही है F(n) = F(n-1) + F(n-2)
गुरु: "देखा अर्जुन? 800 साल पहले, Fibonacci ने खरगोशों की population समझने के लिए यह pattern खोजा। आज हम इसी pattern से सीढ़ियां चढ़ने के तरीके गिन रहे हैं। एक ही गणित—हज़ारों समस्याएं। यही Dynamic Programming की सुंदरता है। जब तुम pattern पहचान लेते हो, तो हज़ारों समस्याएं एक जैसी दिखने लगती हैं।"
अर्जुन: "तो मतलब… खरगोश, सीढ़ियां, संख्याएं—सब एक ही सूत्र से जुड़े हैं?" उसकी आंखों में चमक थी। "अगर मैं एक pattern सीख जाऊं, तो मैं उसे कई जगह इस्तेमाल कर सकता हूं?" उसने गहरी सांस ली। "यह तो…यह तो जादू जैसा है।"
वानर राज: "जादू नहीं, विवेक है। Pattern recognition—यही असली शक्ति है।"

📜 वास्तविक जीवन सूत्र — कुछ भी बनाना, एक कदम एक समय में

अर्जुन ने पैर से पत्थर की सीढ़ी छुई। ठंडी। खुरदरी। असली।

"गुरुजी।" उसकी आवाज़ धीमी आई। "यह सिर्फ सीढ़ियों के बारे में नहीं है, है ना?"

ठहराव। "यह... सब कुछ जैसा लगता है।"

गुरु: "क्योंकि यह सब कुछ है, अर्जुन।" उनकी आवाज़ में वर्षों का बोझ था, असंख्य विद्यार्थियों को यह सत्य समझते देखने का। "तुम्हारे जीवन में इस तरह की हर सीढ़ी प्रकट होती है। पत्थर से नहीं बनी—बल्कि विकल्पों से। आदतों से। 累积 से—वह चीनी शब्द जो तुम्हारी माँ ने सिखाया—संचित प्रयास।"

गुरु बोधि ने लाठी उठाई—सीढ़ियों की ओर नहीं, अर्जुन की छाती की ओर। उसके उस हिस्से की ओर जो अभी भी कह रहा था मैं तैयार नहीं हूं

"तुम algorithms master करना चाहते हो। फिट होना चाहते हो। कुछ ऐसा बनाना जो matter करे। हर new year तुम step zero पर खड़े होते हो, step 100 को घूरते हो, और शुरू करने से पहले ही हार मान लेते हो। वो gym membership। वो online course। याद आया कुछ?"

अर्जुन का जबड़ा कसा। हां। हर एक बार।

"Dynamic Programming वास्तविकता वास्तव में कैसे काम करती है। तुम कदम 0 से कदम 50 तक teleport नहीं कर सकते। भौतिकी इसकी अनुमति नहीं देती। जीवन इसकी अनुमति नहीं देता। तुम केवल तभी आत्मविश्वास से कदम i पर खड़े होते हो क्योंकि तुमने i−1 और i−2 का सम्मान किया—क्योंकि तुमने जो सीखा उसे याद रखा और उस पर निर्माण किया।"

"Coding सीख रहे हो?" गुरु की आवाज़ नरम हुई। "कल तुमने arrays को अंततः समझा। पिछले हफ्ते, loops समझ में आए। आज, तुम linked lists को देख रहे हो और वे समझ में आ रहे हैं—इसलिए नहीं कि तुम अचानक चतुर हो गए, बल्कि इसलिए कि तुमने नींव बनाई। कदम i−1 और i−2 अभी भी वहीं हैं, तुम्हें सहारा दे रहे हैं।"

"पर जब तुम आगे छलांग लगाने की कोशिश करते हो? pointers को समझे बिना graphs और trees पर 2x speed video देखते हो? सीढ़ी ध्वस्त हो जाती है। तुम अंतराल से गिर जाते हो। और फिर तुम खुद को धीमे होने के लिए, 'समझ' न पाने के लिए दोष देते हो। पर सच्चाई सरल और दयालु है: dp[trees] = dp[arrays] + dp[pointers]। तुम कदम छोड़ नहीं सकते। भौतिकी इसकी अनुमति नहीं देती। सीखना इसकी अनुमति नहीं देता।"

गुरु: "प्रगति शायद ही कभी चमत्कार होती है, वत्स। यह लगभग हमेशा dp[i] = dp[i−1] + dp[i−2] होती है—कल के सम्मानित प्रयास, साथ ही उससे पहले वाले। दुनिया रातोंरात की सफलताओं का जश्न मनाती है और उन्हें प्रतिभा कहती है। पर मैंने हर एक को देखा है। वे हज़ार अदृश्य, साधारण, सम्मानित कदमों पर बने थे।"

अर्जुन ने फिर से सीढ़ियों को देखा।

वे सिकुड़ी नहीं थीं। अभी भी उतनी ही ऊंची। पर अब असंभव दीवार जैसी नहीं लग रही थीं।

एक schedule जैसी लग रही थीं।

एक system।

एक promise: हर कदम का सम्मान करो, और वो तुम्हें थामेगा।